– बार बार पुलिस उसके निकट तक पहुंचने की बात दोहरा रही है
– ताश के पत्ते की तरह कार्यवाही को रहस्य बना दिया
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भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार
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मथुरा। महुअन की मंजू का मुददा उलझता जा रहा है। पुलिस कार्यवाही के बाद भी उसे छुपा रही है। जबकि कई दिन से मंजू तक पहुंचने की बात उसने स्वीकारी है। लेकिन ताश के पत्ते की तरह अभी कार्यवाही को गोपनीय क्यों रखना चाह रही है, यह समझ से परे हो गया है।

13 जून को मंजू पत्नी श्यामवीर गोबर थापने के बहाने गायब हो गई थी। उसके बाद उसका कोई अतापता नहीं लग सका। पति श्यामवीर ने उसके प्रेमी सहित चार लोगों के खिलाफ भगाकर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी बात गंगनहर में मिले अज्ञात महिला के शव को मंजू के पिता ने अपनी बेटी का शव बताकर दाहसंस्कार भी कर दिया था। अब पुलिस की जांच दिशा बदल गई। उसके लिए मंजू का जिंदा या मुर्दा बरामद करना चुनौती बन गया था। सीओ रिफाइनरी की अगुवाई में कार्यवाही करते हुए पुलिस को इस बात के सबूत मिल गए कि मंजू जिंदा है। सादाबाद क्षेत्र में उसके रहने की लेकेशन मिली। पुलिस अधिकारियों ने खुद कहा कि पुलिस मंजू तक पहुंच चुकी है। एक दो दिन में घटना से पर्दा हट जाएगा। सूत्रों की बात मानें तो मंजू पुलिस की निगरानी में कहीं कैद है। लेकिन उसके प्रमी व अन्य की गिरफतारी तक वह उसे सामने लाना नहीं चाह रही है , क्यों कि पुलिस की जांच अज्ञात महिला की हत्या में भी चल रही है। जब मंजू जिंदा है तो वह महिला कौन थी, यह यक्ष प्रश्न पुलिस के सामने खडा है। मंजू के पिता ने उसकी पहचान खुद की बेटी के रूप में कैसे की, जब कि बेटी की पहचान के काफी चिन्ह थे, जो उस महिला के नहीं थे। अज्ञात महिला के शव का इस घटना से कोई संबंध हो सकता है क्या, इस द्रष्टिकोण से भी पुलिस जांच घूम रही है। बहरहाल कुछ भी हो। लेकिन यदि मंजू पुलिस की निगरानी में भी होगी तो, वह तब तक उसे लेकर सामने नहीं आएगी, जब तक उसके प्रमी और नामजद अन्य ग्रामीण गिरफतार नहीं हो जाते। सूत्रों की मानें तो पुलिस अभी मंजू को सामने लाएगी तो उसके पूरे प्लान पर पानी फिर सकता है। क्यों कि मंजू को बंदी प्रत्यक्षीकरण प्रक्रिया से बचने के लिए पुलिस को 24 घंटे के अंदर सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत करना होगा।






