भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार

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मथुरा। फर्जी शिक्षक नियुक्ति मामले में एसटीएफ की कार्यवाही से बीएसए दफतर में हडकम्प मचा हुआ है। बाबू और अन्य कर्मचारी सहमे हुए हैं। हालांकि घोटाले में संलिप्त ज्यादातर कर्मचारियों को एसटीफ जेल भेज चुकी है। लेकिन आफिस के अभी और कर्मचारी भी रडार पर हैं।
12740 बेसिक शिक्षकों की नियुक्ति मामले में फर्जी शिक्षक भर्ती को लेकर जनपद के विभागीय अधिकारी बुरी तरह फंस गए हैं। एसटीएफ ने अब तक का सबसे बडा माने जा रहे घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस प्रकरण में प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर 16 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। बीएसए संजीव कुमार सिंह और चार खंड शिक्षा अधिकारियों को भी निलम्बित किया जा चुका है। कई स्कूलों के हेडमास्टरों पर भी गाज गिरना लगभग तय हो गया है। लेकिन ऐसा तो होना ही था। यदि आप कभी बीसएस आफिस गए हों तो यह नजारा हर कोई देख सकता था कि बीएसए खुद अपने चाटुकार बाबुओं से हर समय घिरे नजर आते थे। यही नहीं कुछ बाबुओं के ईशारे पर ह ीवह कार्य करते थे। बाबू चाहते थे तो गलत को सही करवा देते थे और नहीं चाहते थे, तो सही को गलत करा देते थे। यानी सही कार्य को भी बीएसए नहीं करते थे। यही नही ं एक एक बाबू पर दसदस साल से वही पटल मिला हुआ हैं पटल को दस साल बाद भी बदलने की कोशिश नहीं की गई हैं ।
फैक्ट फाइल
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-फजी शिक्षक नियुक्त 36
-अब तक जेल भेजा 16 को
-निलम्बित किए- बीएसएस संजीव कुमार, एबीएसस विनोद कुमार, गोवर्धन सिंह, राकेश सिंह व एक अन्य खंड शिक्षा अधिकारी
– सन 2012 से हुई शिक्षक भर्ती की कर रही एसटीएफ जांच
-100 से ज्यादा फर्जी शिक्षकों का रिकार्ड आया सामने






