भरत लाल गोयल

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फरहं। पति-पत्नी के बीच ऐसा जज्बा शायद ही देखने को मिले। तपती दोपहर में आग सी दहकती सडक पर नंगे पैर देवी के दर्शन की लालसा में चले जा रहे हैं। न खाने की फिक्र है न सोने की चिंता।
टपरापरकोट धाम आगरा के बंटी बाल्मीकि और उसकी पत्नी कवि अपने गांव से नगर कोट देवी की यात्रा को संकल्प के साथ निकले हैं। पत्नी देवी का लाल झंडा लेकर चल रही है तो पति आगे आगे हाथ में झाडू लेकर रास्ता साफ करते हुए चल रहा है। भयंकर लू के थपेडे भी उनको बेचैन नहीं कर रहे हैं। बंटी कहता है कि वे रोजाना दस किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हैं। इसके बाद वे विश्राम करते हैं। बंटी बताता है कि पति पत्नी आगरा के एक अस्पताल में काम करते हैं। उन्होने देवी दर्शन को चार माह की छुटटी ली है। व ेअब देवी के दर्शन कर नवरात्रा के बाद लौटेंगे। वह कहता है ि कइस रास्ते पर पापी भी चल रहे हैं। रास्ता पर उनके पापों से भर गया है। क्यों कि वे पवित्रता लिए देवी के दर्शन को जा रहे हैं। इसलिए रास्ते के विकारों को भी झाडू के माध्यम से समाप्त करना चाहते हैं। उनके पैर पवित्र रास्ते पर पडे, ऐसा इस लिए किया जा रहा है। बंटी कहता है कि समाज में बुराई बढ गई हैं। मन्दिरों के आसपास गंदगी का ढेर लगा रहे हैं। मदिरा मांस का सेवन किया जा रहा है। वह कहता है कि साहब, वे पतिपत्नी नवरात्रों में नगरकोट देवी के मन्दिर की भी झाडू से सफाई करेंगे। आसपास की गंदगी को रोजाना साफ किया जाएगा। वह कहता है कि उनके केवल दर्शन की अभिलाषा है।

न खाने की चिंता है न विश्राम की। वह कहता हैकि रात में तमाम आस्थावान लोग मिलते हैं। वे श्रद्वावनत उनको खाना और विश्राम दे रहे हैं। वह कहता है कि उनका इस यात्रा का उददेश्य समाज की गदंगी को दूर करना है । अभी तक वे अस्पताल की गंदगी को दूर कर रहे थे। अब वे इस धार्मिक यात्रा के जरिए स्वच्छता की अलख जगाएंगे।






