बतखे पानी के गड्ढे में किलोल कर बाहर ही गर्मी को दूर
पक्षियों और विविध जीव जंतुओं से आकर्षक हो रहा है कॉलेज कैंपस
भरतलाल गोयल चीफ एडिटर पी दी यू समाचार
फरह। जंगलराज का मतलब, जंगल में दोस्ती कम दुश्मनी ज्यादा मिलती है, लेकिन फरह में ऐसी जगह भी है जहां कबूतर और खरगोश साथ-साथ जीवन के सफर को पूरा कर रहे हैं बड़ी तन्मयता और अजीज रिश्ते के साथ।
एक कोने पर पानी के गड्ढे में किलोल करती बतखों का झुंड व दूसरी ओर पड़े पिंजड़ेनुमा ग्राउंड पर खरगोश उनके बच्चों और गुटर गू करते कबूतर। हर किसी के मन को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं इस भीषण गर्मी में अपने को समायोजित करने की कला कोई इन जीव-जंतुओं से ही सीखे।
जीहां फरह का धन्वंतरी इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन जीव जंतुओं के आकर्षण का भी केंद्र बना हुआ है। यहां लगभग 50-60 खरगोश दिनभर मैदान में कुलांचे मारते दिखाई देंगे तो बतखे भी तर्राती हुई दिखाई देंगी। बतखों का टर्राना भी अजीब है कोई अजनबी दिख जाए तो उनकी आवाज कम नहीं हो सकती। तीसरे कोने पर विदेशी प्रजाति का एक कुत्ता भी बरवस सभी को लगा लेता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्र के युवाओं को शिक्षित करने वाला कॉलेज कैंपस वर्तमान में सौम्य जीव-जंतुओं का केंद्र भी बनता जा रहा है। यहां आने वाला स्टूडेंट हो या अभिभावक प्राकृतिक नजारे को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है। हरे-भरे माडबल्स लोन में सफेद मार्बल जैसे रंग के खरगोश कुलांचे मारते हैं तो लुभा जाते हैं। यही नहीं बतखों के लिए बाजार से हजारों रुपए का दाना भी खरीदा जाता। तथा खरगोशों को सीजनल फल और सब्जियां खिलाई जाती हैं। कॉलेज सचिव प्रियंक सारस्वत बताते हैं कि खरगोश बहुत ही सीधा और भोला टिनी जीव है। इनकी बड़ी खूबसूरत मिजाजी के साथ यहां देखभाल की जाती है। 10 से 15 किलो गोभी,टमाटर या गाजर,इन को रोजाना खिलाया जाता है। और इनको न्यूट्रींश भी प्रदान किए जाते हैं। बताते हैं कि कॉलेज सचालन अलग है और यह अलग प्रकरण है। कॉलेज कैंपस में एक हिरण का बच्चा भी भ्रमण करता था लेकिन कुछ समय पहले उसकी बीमारी के चलते मौत हो गई। उसकी जगह पर अब कोने में बैठा शांत नेचर के बंदर मुंह चलाते हुए देखेंगे।






