बकरी वध एवं मूल्य सम्वर्धित बकरी मांस उत्पाद प्रसंस्करोह सम्पन्नरण‘ प्रशिक्षण का समापन

स्वास्थ्यकर (साफ-सुथरा) बकरी वध एवं मूल्य सम्वर्धित बकरी मांस उत्पाद प्रसंस्करण‘ पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण का समापन किया गया। समापन समारोह आई.सी.ए.आर. – केन्द्रीय बकरी अनुसंधान, संस्थान, मखदूम फरह मथुरा के समिति कक्ष में आयोजित किया गया था। गोवर्धन निर्वाचन क्षेत्र के माननीय विधायक श्री करिंदा सिंह तकोरे इस अवसर के मुख्य अतिथि थे। श्री महिपाल सिंह जी, किसान कल्याण मोर्चा सम्मानीय अतिथि थे।


पाठ्यक्रम निदेशक डॉ वी. राजकुमार ने बताया कि कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया और देश के विभिन्न हिस्सों के प्रशिक्षु प्रशिक्षण कार्यक्रम से लाभान्वित हुए। इस विषय पर अगला प्रशिक्षण कार्यक्रम 10-15, दिसंबर 2018 में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशिक्षुओं को विभिन्न बकरी के दूध और मांस प्रसंस्करण पर स्वेयं प्रयोग करके प्रशिक्षित किया गया इसके साथ ही यह उल्लेखनीय तथ्य है कि इस संस्थान में पहली बार ऐसा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया हैं। सभी प्रशिक्षु देश के अपने संबंधित राज्यों में नए उद्योग को खोलेंगे।
प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र के वितरण के बाद श्री करिंदा सिंह तकोरे और श्री महिपाल सिंह ने संस्थान के देश के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया और आश्वस्त किया कि प्रशिक्षु नए उद्योग खोलेंगे जो नए रोजगार के अवसरों को खोलेंगे और साथ ही किसानों को भी लाभ पहुंचाएंगे।
प्रशिक्षुओं ने पाठ्यक्रम संरचना की सराहना की और सुझाव दिया कि यह पाठ्यक्रम शुरुआती कारोबारियों के लिए विशिष्ट है। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से बहुत कुछ सीखा जो उद्योग की स्थापना में उनके लिए निश्चित रूप से उपयोगी होगा।
प्रशिक्षुओं को अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ताओं की मांग के अनुरूप ऐसी गतिविधियों और आवश्यकता व महत्व के संचालन के लिए प्रशिक्षित मानव शक्ति की आवश्यकता समझाई गई। बकरी मांस वध, बिक्री और निर्यात के मामले में उन्हें भारत और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न मानकों के बारे में समझाया गया।
बकरी मांस और मांस उत्पादों का मूल्यवर्धन देश के लिए महत्वपूर्ण है। मूल्यवर्धित उत्पाद प्रोसेस से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं और मांग भी बहुत है। विशेष रूप से मांस उत्पादों को खाने किया तैयार किया जाता है। बकरी मांस नगेट्स, पैटीज और कोफ्ता जैसे मांस उत्पादों के कुछ उदाहरण है। इमल्शन आधारित उत्पादों की तैयारी प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक रूप से समझाई गई और वे स्वयं भी उत्पादों की तैयारी में शामिल थे। स्वच्छता, गुणवत्ता और स्वाद की आवश्यकता महत्वपूर्ण मानदंड थे और उन्हें गहराई से समझाया गया। उत्पादों की पूर्व और अन्तिम तैयारी की आवश्यकताओं को समझाया गया ।
सॉसेज महत्वपूर्ण मांस उत्पाद में से एक है और मांग में उच्च है और प्रशिक्षुओं को सॉसेज तैयारी के लिए उपयोग की जाने वाली केसिंग की तैयारी के बारे में समझाया गया था। सॉसेज तैयारी का प्रदर्शन किया गया था और प्रशिक्षुओं को बाजार की मांग और उन्हें तैयार करते समय गुणवत्ता की जरूरतों के बारे में समझाया गया था।
स्नैक मांस उत्पादों को तैयार किया गया था और उत्पादों को प्रशिक्षुओं द्वारा अच्छी तरह से स्वीकार किया गया था और उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पादों की उच्च मांग होगी। उन्होंने खुद को तैयार किया और प्रोटीन घाटे के समय में ऐसे उत्पादों की आवश्यकता को समझाया गया।
बकरी दूध पनीर स्वादिष्ट उत्पाद में से एक है और प्रशिक्षुओं को बकरी के दूध पनीर की तैयारी के बारे में व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित किया गया था। उन्हें पनीर तैयारी और विपणन के बारे में स्वच्छता और पैकेजिंग आवश्यकताओं के बारे में समझाया गया था।
प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक रूप से सामान्य तापमान पर बकरी मांस और दूध उत्पादों को संरक्षित करने प्रविधि बताई गई जिससे उत्पाद कमरे के तापमान पर 12 माह तक सुरक्षित रह सकते हैं। परिणाम स्वरूप विभिन्न उत्पादों को देश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से पहुंचाया जा सकता है शीत श्रृंखला रखरखाव समस्या है। प्रशिक्षुओं ने पैकेजिंग आवश्यकताओं, तैयारी की जरूरतों और प्रतिरक्षा में प्रसंस्करण को ध्यान से समझा। संस्थान के निदेशक डाॅ. एम.एस. चैहान ने कहा कि जो भी प्रशिक्षु इस प्रशिक्षण के प्रतिभागी है संस्थान उनके सहयोग में सदैव तत्पर रहेगा इसके साथ ही आश्वस्त किया उद्योग संचालन में यदि कोई समस्या आती है तो संस्थान उनका मार्गदर्शन करेगा।
मुख्य अतिथि श्री कारिदा सिंह ने इस प्रशिक्षण की सराहना करते हुए लघु उद्योगों में बढ़ोत्तरी के लिए उपयोगी बताया।
मंच संचालन डाॅ. अरून कुमार वर्मा ने एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. सुमन किया ने किया। इस अवसर पर संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. एस.के. जिन्दल, डाॅ. यू.बी. चैधरी, डाॅ. एम.के. सिंह, डाॅ.एस.डी.खर्चे, डाॅ. एम.एस. डिगे, डाॅ. नीतिका शर्मा इत्यादि उपस्थित थे।

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