अब 6 माह से भी ज्यादा समय तक सुरक्षित रह सकेंगे पनीर, दूध और मीट

– सीआईआरजी में खाधपदार्थ संरक्षण पर ईजाद की नई पहल

– देश बिदेश से लोग फूड प्रोसेसिंग पर प्रशिक्षण भी ग्रहण कर रहे

भरत लाल गोयल, चीफ एडीटर पीडीयू समाचार

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फरह। केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मखदूम ने फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में अनूठी पहल की है। इस क्षेत्र से जुडे उधोगों और व्यवसाईयों को निकट भविष्य में निश्चितरूप से लाभ मिलेगा।

दरअसल बदलते मौसम और ज्यादा गर्मी के कारण अभी तक खाध पदार्थ एक दो दिन में खराब हो जाते थे। उनको संरक्षित रखने के लिए फ्रीज आदि का सहारा लेना पडता था। लेकिन व्यवसाय फ्रीज से संभव नहीं हो सकता। जो व्यवसाई मीट, दूध , पनीर और अन्य खाध प्रसंस्करण के क्षेत्र में हैं, उनको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इस पर सीआईआरजी मखदूम ने नई पहल की है। अब आप सामान्य तापमान पर एक साल तक पनीर दूध और मीट को सुरक्षित और खाने योग्य रख सकते हैं। सीनियर साइंटिस्ट वी राजकुमार ने इस विषय पर रिसर्च किया। यही नहीं उन्होने खाध प्रसंस्करण के कंजरवेशन पर पीएचडी भी किया, इसमंे वे एक तकनीकि से रूबरू हुए। टेंडर के जरिए संस्थान ने चेन्नई से दस लाख की कीमत वाली रिट्राट पाउच पैंिकंग मशीन का क्रय किया। यह मशीन कम्प्रहेशन और वैक्यूम पर काम करती है। 121 डिग्री सेल्सियस तापमान पर फूड प्रोसेसिंग करते हुए पैकिंग करती है। साइंटिस्ट वी राजकुमार बताते हैं कि एक बार में 25 पैकिंग इससे की जा सकती हैं। दिन मंे दस बैच निकाले जा सकते हैं । यानी 250 पैकिंग मशीन रोजाना करती है। इसकी पैकिंग में एल्यूमिनयम आक्साइड और पाॅली प्रापलेन, नाइलोन युक्त शीट का प्रयोग किया जाता है। वैक्यूम प्रेशर पर काम करने वाली मशीन में 121 डिग्री सेल्सिय से तापमान पैकिंग के समय गिरकर 40 तक आ जाता है। बैज्ञानिकों के अनुसार इस पैकिंग फूड को आप साल भर तक सामान्य तापमान पर सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन पैकिट खुलते ही उसका पूरा प्रयोग करना जरूरी होगा। उन्होने बताया कि उच्च तापमान पर खाधपदार्थ के पोर्स को मशीन पैकिंग के दौरान नष्ट कर देती है जो पदार्थ को खराब करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। फूड प्रोसेंिसंग के क्षेत्र में इसे एक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। इसके लिए उत्तराखंड , राजस्थाना और महाराष्ट आदि से तमाम लोग संस्थान में प्रशिक्षण भी ग्रहण कर रहे हैं। देखना यह है कि भविष्य में इसका कितना उपयोग हो पाता है।

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