राजनीतिक दबाव या खानापूर्ति
फरह।देवेन्द्र गोस्वामी
PDU समाचार
भारत माता के नारे..या फिर राष्ट्र के नारे लगाना देशवासीयो के लिए गर्व की बात होती है। हर राष्ट्रीय पर्व पर ये नारे गुंजायमान होते हैं।
फोटो- चन्द्रवीर

कवि मुहम्मद इकबाल ने हिन्दुस्तान को सारे जहां से अच्छा बताया। देश हित में कसीदे पढ़े। एक वह भी मुस्लिम थे और एक मुबीन भी।
छोटी सी बात पर इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया। क्या यह मुबीन का राष्ट्रीय कर्तव्य नहीं था। हिन्दू मुस्लिमों ने तो देश की आजादी की लड़ाई साथ साथ लड़ी। तब इतनी संकीर्णता होती तो शायद देश आजाद हो पाता? यह यक्ष प्रश्न है। दूसरी ओर पुलिस ने भी वायरल वीडियो को आधार मानकर त्वरित कार्यवाही कर डाली और धार्मिक भावना आहत करने के आरोप में एक ग्रामीण को जेल भेज दिया। लेकिन भारत माता के नारे लगाने में किस तरह की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई, इसका जवाब शायद पुलिस के पास भी नहीं होगा। 20 सेकंड के वीडियो में कुछ युवक मुबीन से भारत माता के नारे लगाने को कह रहे हैं। हालांकि तरीका, स्थान गलत हो सकते हैं किन्तु नारा नहीं। जय श्री राम..हर हर महादेव..जय मातादी के नारे मुबीन से लगवाए होते तब तो यह प्रश्न खड़ा होना स्वाभाविक था।






