दानघाटी गिरिराज बने भगवान अनंत,अनंत चतुर्दशी पर फूल बंगला में विराज चखे 56 भोग

गोवर्धन। मुरली की धुन पर गोपियों को नचाने वाले कान्हा ने जब भगवान अनंत का स्वरूप धारण किया तो भक्तों ने भी प्रभु को प्रसन्न करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महकते पुष्पों से महल तैयार कर प्रभु को विभिन्न प्रकार के भोग समर्पित किए।


रविवार को सेवायत मथुरा दास कौशिक ने दानघाटी गिरिराजजी का अद्भुत श्रृंगार कर प्रभु भगवान अनंत का स्वरूप धारण कराया। श्रंगार में 14 तरह के रंग और 14 तरह के पुष्पों का प्रयोग किया गया। दर ओ दीवाल को कलियों से ख़ूबसूरत बना दिया। प्रभु ने 56 भोग चखे तो भक्त जयकारे लगाने लगे। सेवायत पवन कौशिक ने बताया कि आज अनंत चतुर्दशी पर प्रभु का अनंत श्रंगार किया गया है।अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी। इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए वह स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। शाम ढलते ही मंदिर परिसर रोशनी से झिलमिला उठा। स्वर्णिम आभा से दमकते गिरिराजजी को नजर न लग जाए, इसी भाव से मथुरा दास कौशिक ने प्रभु की नजर उतारी। बदलते मौसम को देखते हुए प्रभु को शयन में दूध के साथ काली मिर्च और मोहन भोग समर्पित किया गया। दर्शनों को भक्तों की उमड़ती भीड़ ने देर रात तक थमने का नाम नहीं लिया। इस मौके पर हरिशंकर कौशिक, राजकुमार शर्मा, धीरज कौशिक, कन्हैया लाल शर्मा आदि थे।

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