फरह| एसीएमओ डॉ प्रवीण कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बीते दिवस कस्बे में झोलाचाप डॉक्टरों की खबर ली | लेकिन टीम की फौरी कार्यवाही कई सवाल छोड़ गई है |

प्रथम, फरह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर न तो डॉक्टर मौजूद हैं न दवाएं | इंजेक्शन लगवाने के लिए डिस्पोजल सिरिंज मरीज को बाजार से लानी पड़ती है | फोड़ा फुंसी का पेस्ट ट्यूब भी मरीजों को मार्केट से खरीदना पड़ रहा है | वर्तमान में विभिन्न सामान्य रोगों में प्रचलित दवाओं में से दस फीसदी दवाएं भी केंद्र पर उपलब्ध नहीं होती है | इसके अलावा डॉक्टर्स के 80 फीसदी पद खाली पड़े हैं | ऎसे में इन लचर व्यवस्थाओं के चलते मरीज कहाँ जाए | इसके बाद भी कस्बे में जिन झोलाछाप डॉक्टरों की संवेदन शील दुकान है | कई बार मरीज मरने की घटनाएं इन पर हुई है | ऎसे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई | यही कारण है कि आज भी वे दुकाने धड़ल्ले से चल रही है | छापेमारी कार्यवाही करनी थी तो ऎसे झोलाछापों के विरुद्ध करनी चाहिए थी, किंतु ऎसा न कर मात्र तीन दुकानों को निशाना बनाया गया, क्यूं? बात करें तो कस्बे में तीन फर्जी पैथोलॉजी है | दो दर्जन से ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर हैं | आखिर इन पर रहमत क्यूँ दिखाई गई, ये हर किसी की समझ से परे है |






