– पुरानी परंपरा मृत्यु भोज में आज भी लाखों खर्च करते हैं।
हरेकृष्ण गोयल

मांट।मृत्यु भोज को लेकर आज भी देहात में सोच नहीं बदली है,लोग अपने बुजुर्गों की याद में लाखों रुपया खर्च करके तेरहवीं कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

देहात में विवाह शादी से ज्यादा खर्च एक मृत्यु भोज में लोग खर्च करने से जरा भी नहीं चूकते हैं।लम्बे समय से देहात में मृत्यु भोज की परंपरा चली आ रही है।देहात में लोग मृत्यु भोज में पूरे गांव कोई पूरे इलाके कोई पूरी एक घार तो कोई पूरी तहसील तो कई लोग पूरे जिले को चूल झरा (सभी वर्गों के महिला पुरुष) का न्यौता भेजते हैं। परिवार में किसी प्रिय बुजुर्ग की मौत होते ही इस तरह के बड़े कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो जाती है।पूरे गांव की पंचायत की पंचायत की जाती है,जिसमें लोगों को उनकी सामर्थ्य के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी जाती है।

कई दिन पहले लगते हैं हलवाई ऐसे बड़े भोज के कार्यक्रम में कई दिन पहले हलवाई अपना काम शुरू कर देते हैं,बड़ी तादाद में भट्टियां चलती हैं तो दर्जनों लोग अन्य काम निपटाते हैं। दावत में माइक लगा कर मचान से व्यवस्था देखी जाती हैं। रविवार को होगा मृत्यु भोज रविवार को गांव चोकड़ा बाडौन में गाँव की बुजुर्ग महिला अंगूरी देवी की स्मृति में उनके पुत्र सत्यपाल,सत्यवीर,सुखवीर व सोनवीर पूरे जिले की झरा दावत कर रहे हैं,इसके लिए पूरे जिले में गाड़ियों द्वारा न्यौते दिए जा रहे हैं,तो सभी ग्राम प्रधानों से सम्पर्क कर कार्यक्रम में सहभागिता की अपील की जा रही है। ककरारी के प्रधान लेखराज सिंह ने बताया कि आसपास के सभी गांवों के लोग व्यवस्था में जुटे हुए हैं।






