-गिर्राज जी के खजाने में करोड़ों रुपये के गबन पर NHRC के नोटिस पर जिलाधिकारी ने एसडीएम को सौपी जांच।
-एसडीएम ने कराये प्रबंधक और सचिव के वयान दर्ज
परीक्षित कौशिक
मथुरा:- उत्तर प्रदेश की योगी सरकार घोटालेवाजों पर शिकंजा कसने के वेशक लाख दावे क्यों न करती हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में घोटालेवाजों पर कार्यवाही होती नजर नही आ रही है। करोड़ों श्रद्धालु भक्तों के आस्था का केंद्र और योगी सरकार में तीर्थ स्थल घोषित गोवर्धन धाम के प्रमुख दानघाटी मन्दिर के खजाने से करीब पौने ग्यारह करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।

जिस घोटाले का खुलासा मन्दिर समिति के पदाधिकारियों में विरोध होने पर समिति के सचिव रमाकांत कौशिक ने बैंक स्टेटमेन्ट तथा ठेका रजिस्टर से उजागर किया है। मन्दिर के सचिव ने घोटाले की शिकायत जिलाधिकारी मथुरा सहित बरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर सचिव ने मानवाधिकार आयोग में शिकायती पत्र देकर शिकायत दर्ज कराई। मानवाधिकार आयोग ने जिलाधिकारी मथुरा और ब बरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस थमा दिया। आयोग से नोटिस मिलने पर जिला प्रशासन की नींद टूटी और जिला प्रशासन ने एसडीएम गोवर्धन को प्रकरण की जांच सौंप कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली।
सोमवार को एसडीएम ने मन्दिर के प्रबन्धक डालचंद्र चौधरी और सचिव रमाकांत कौशिक के वयान दर्ज किए। आरोप है कि मन्दिर के सहायक प्रबंधक द्वारा मई-2017 से मार्च 2018 तक मन्दिर की भेंट ठेका नीलामी के करोड़ों रुपये की धनराशि को समिति के अकाउंट में जमा नहीं की है। इस सम्बन्ध में श्री गिर्राज सेवक समिति के मंत्री रमाकान्त कौशिक द्वारा मन्दिर के सहायक प्रबंधक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए बरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा को प्रार्थना-पत्र दिया था मन्दिर के सहायक प्रबन्धक के कार्यवाही न होने पर राज्य मानवाधिकार आयोग को उक्त प्रकरण पर अवगत कराया कि आज तक रिपोर्ट को दर्ज नहीं की गई है, रिपोर्ट दर्ज कराकर विधिक कार्यवाही की मांग रखी। रमाकान्त कौशिक के प्रार्थना पत्र पर प्रकरण का संज्ञान लेते हुए NHRC ने नोटिस जारी किये। जिस प्रकरण में एसडीएम नागेन्द्र सिंह द्वारा जांच की जा रही है। रमाकान्त कौशिक ने सेवायत समाज के लोगों के साथ मिलकर उपस्थित हुए एसडीएम गोवर्धन को इस सम्बन्ध में साक्ष्य के रूप में बैंक स्टेटमेन्ट, ठेका नीलामी की धनराशि की डिटेल्स, माह बार अमाउंट मय दिनांक खाते में जमा धनराशि का विवरण और मा o न्यायालय सिविल जज सीनियर डिवीजन चतुर्थ मथुरा के आदेश दिनांक 25/02/2019 की प्रति और साक्ष्य उपलब्ध कराकर अपने वयान दर्ज कराये।

मा. न्यायालय अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या -02/सिविल जज सीनियर डिवीजन -02 मथुरा द्वारा पारित अपने आदेश दिनांक में 25/02/2019 से अवगत कराया कि न्यायालय द्वारा भी यह स्पष्ट किया चुका है कि सहायक प्रबन्धक डालचन्द चौधरी द्वारा दाखिल ठेका रजिस्टर व बैंक स्टेटमेन्ट के अनुसार माह मई-2017 से मार्च-2018 तक भेंट नीलामी ठेका उठाया गया है। सहायक प्रबन्धक डालचन्द चौधरी द्वारा न्यायालय के स्पष्ट आदेश के पश्चात भी सम्पूर्ण स्टेटमेन्ट व प्रलेख दाखिल नही किये गये पत्रावली पर दाखिल अन्य प्रलेखों के अवलोकन के अनुसार भेंट ठेका नीलामी उठाया गया है। नियमानुसार नीलामी की सम्पूर्ण धनराशि समिति के बैंक खाते में होनी चाहिये। परन्तु सहायक प्रबन्धक डालचन्द चौधरी द्वारा दाखिल बैंक स्टेटमेन्ट के अनुसार उठायी गई धनराशि को पूर्ण रूप से समिति बैंक में जमा नहीं कराया गया है एवं उसके उपरांत उठे ठेकों की समस्त धनराशि भी समिति के बैंक खाता में जमा नहीं की गई है। सहायक प्रबन्धक डालचंद चौधरी द्वारा न्यायालय के आदेश के उपरांत भी जिन शर्तों के अधीन प्रबन्धक का कार्य सौंपा गया कि प्रत्येक कार्य उपरांत न्यायालय को अवगत करायेंगे, इसका कोई अनुपालन सहायक प्रबन्धक डालचन्द चौधरी द्वारा नहीं किया है। पत्रावली पर दाखिल अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि सहायक प्रबन्धक डालचन्द चौधरी द्वारा स्वयं को सर्वेसर्वा मानते हुए बिना न्यायालय को सूचित किये समस्त वित्तीय व प्रशासनिक कार्य सम्पादित किया जा रहे है। जितनी धनराशि ठेका नीलामी से प्रत्येक माह उठायी जा रही हैं उतनी धनराशि सहायक प्रबन्धक डालचन्द चौधरी द्वारा समिति के बैंक अकाउंट में जमा नहीं की जा रही।






