बेमौसम की बरसात ने किसानों के अरमांन पर फेरा पानी – गेहूं की कटी फसल खेतों में डूबी पानी में – गेहूं की बाल सडने व झडने की सम्भावना

 


मथुरा। भरत लाल गोयल
बेमौसम की बरसात किसानों के लिए कयामत लेकर आई है। हजारों एकड गेहूं की फसल पर संकट खडा हो गया है।
सालभर मेहनत के बाद किसान को आलू की खेती की तरह गेहूं की फसल से भी उम्मीद थी। नब्बे फीसदी गेहूं की खडी फसल घर लाने के लिए किसानों ने मजदूर लगाकर काट दी थी। लेकिन पलपल गिरगिट की तरह बदलते मौसम के बारे में उनको मालुम नहीं था। अभी सोमवार की झमाझम बरसात का पानी खेतों में से सूखा भी नहीं, कि बुधवार की शाम को अचानक आसमां में काले काले बदरा मडराने लगे। छह बजे ही घोर अंधकार छा गया और देखते देखते काले काले बादल उमड पडे, फिर धरती को तर कर डाला। अब किसान कभी अपनी किस्मत को केास रहा है तो कभी ऊपर वाले को। किसान मंसो, नन्दराम, प्रताप, सनौरा के गयाप्रसाद, प्रेमसिंह, छाता के बृजकिशोर, सत्यवीर शर्मा आदि का कहना है िकइस बार गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद है। जिलेभर से मिली रिपोर्टस के अनुसार बरसात के कारण खेतों में कटी गेहूं की फसल गीली ही नहीं हुई है वरन गेहूं की पूडी पानी में डूबने लगी हैं। ऐसे में उनमें से गेहूूं के दाने निकलने की संभावना नगण्य हो गई है। किसानों का कहना है कि गीली बाली से दाना निकलना मुमकिन नहीं है। मौसम इसी तरह की आंखें दिखाता रहा तो पानी में गेहूं के दाने फूलकर बिखर भी जाएंगे। तब किसान को सिर्फ आंसू नसीब होगे।
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पंाच फीसदी किसान ला सके गेहूं घर
अभी तक मात्र पांच फीसदी किसान ही गेहूं की मडाई के बाद दाने को घर ला सके। एक किसान ने बताया कि उसने समय से थोडा पहले फसल बोई थी। जल्द पकने के कारण वह दो तीन पूर्व फसल को घर ले आया। सवा बीघा में चालीस मन गेहूं उत्पादित हुआ है।
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छटीकरा, जैंत में बरसे ओले
मथुरा। बुधवार की शाम को तेज बारिश के साथ जनपद में ओेले भी बरसे। ओलों ने किसानों के जले पर नमक छिड दिया।
मथुरा, छटीकरा,जैंत, मघेरा, राल बाटी आदि स्थानों पर बरसात के साथ ओले भी पडे। किसानों के अनुसार ओले सौ ग्राम से दो सौ ग्राम के बीच में थे। इसने किसानों की बर्वादी की रही सही कसर पूरी कर डाली।
नेताओं ने किया खेतों का दौरा
गेहूं की फसल चैपट होने के बाद नेताओं ने दौराकर किसानों को सांत्वना प्रदान की और सरकार तक उनकी पीडा पहुंचाने का भरोसा दिलाया।
जिलापंचायत सदस्य वीरेन्द्र सिंह ने भाहई, सेरसा, पीलुआ सहित आधादर्जन गांवों का दौरा कर फसलचक्र को देखा। गेहूं की फसल तबाह थी। उन्होने क्षेत्रीय किसानों को भरोसा दिया कि उनकी आबाज उठाई जाएगी। पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष चै अनूपसिंह, जिलापंचायत सदस्य अरूणसिंह ने झुडावई, परखम, रैपुराजाट सहित कई गांवों का दौरा कर किसानों की बर्वाद फसल को देखा। उनहोने बताया िक किसानों का मौसम ने चैपट कर डाला है। खाने के भी किसानों को लाले पड गए हैं।स्थानीय बिधायक ने भी दौरा कर किसानों की पीडा जानी।
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हाईवे डूबा पानी में , वाहन मुसीबत में
सरकार टोल के नाम पर भारी रकम वाहनचालकों या वाहनस्वामियों से बसूल रही है। लेकिन एनएच-2 के हालात कदापि अच्छे नहीं है। बरसात का पानी हाईवे को अपने आगोश में ले लेता है। बुधवार को बरसात ने रिफाइनरी और महुअन टोल पर खूब उत्पात मचाया। हाईवे की एक लेन पानी में डूब गई। वाहनों चालकों के सामने मुसीबत खडी हो गई। उनको पानी से होकर अपने वाहन ले जाने पड रहे थे। ऐसे दुपहियावाहनों के लिए तो खासा संकट था। लेकिन इस मामले में एनएच-2 से जुडा कोई अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था।

 

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