♦MATHURA,DDU NEWS

लकड़ी माफियाओं का खेल बेखौफ जारी है। एक लंबे समय से हरे भरे वृक्षों को कटवाकर लकड़ी माफिया जहां एक ओर धरती की हरियाली उजाड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार के अरमानों पर पानी फेरते हुए हर महीने लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। हकीकत को देखा जाए तो सरकार धरती की हरियाली बरकरार रखने के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपए वृक्षारोपण अभियान के नाम पर खर्च करती आ रही है। समाज सेवी, जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के नेताओं तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साए में वृक्षारोपण अभियान चलाती है। वृक्षारोपण अभियान के तहत धरती पर हरियाली बरकरार रहे तथा आम जनमानस का जीवन सुरक्षित रहे, लेकिन शमशाबाद क्षेत्र में लकड़ी माफियाओं ने शायद कसम खा ली है कि धरती की हरियाली मिटाकर ही दम लेंगे।
बीते दिन गिरिराज तलहटी में बड़ी परिक्रमा मार्ग स्थित मोदी भवन क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो उसे विभिन्न प्रजातियों के दर्जनों पेड़ों के कटे हुए ठूंठ मिले। लकड़ी मौके से गायब मिली।
इससे पहले सदर में और औद्योगिक क्षेत्र रिफायनरी में भी हरे वृक्ष कटान का मामला तूल बना था।
टीटीजेड कटान कांड: 82 हरे वृक्षों की हत्या में नामजद आरोपी,फिर भी पुलिस मौन,आखिर कब होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश ताज ट्रैपेजियम ज़ोन की संवेदनशील सीमा के भीतर,औद्योगिक क्षेत्र साइट बी रिफायनरी के पार्क संख्या 6 में 82 हरे-भरे वृक्षों के अवैध कटान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।इस पर्यावरण अपराध के लिए वन विभाग ने सीधे तौर पर बीएन ग्रुप और जेसीबी मशीन के मालिक को अपनी तहरीर में नामजद किया है,लेकिन घटना के इतने दिन बाद भी दोषियों पर कार्रवाई शून्य है।बार बार यह सवाल उठ रहा है क्या धन-बल के प्रभाव में स्थानीय पुलिस दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है, और जाँच की दिशा को बदला जा रहा है।तहरीर में पुख्ता सबूत,फिर भी जाँच पर प्रश्नचिह्न उठने लगे हैं।
वन विभाग की बीट प्रभारी आरती द्वारा रिफाइनरी थाने को दी गई शिकायत में दोषियों की पहचान और अपराध की प्रकृति स्पष्ट है।बता दें औद्योगिक क्षेत्र रिफाइनरी में 11 अक्टूबर को निरीक्षण के दौरान, टीम ने पार्क संख्या 6 में यूकेलिप्टस और ज्यूलीफलोर के 82 हरे वृक्षों को जेसीबी मशीन द्वारा निर्ममता से उखाड़ा हुआ पाया गया।जिसमें यूपीएसआईडीए के दस्तावेज़ों और पूछताछ के आधार पर, वन विभाग ने स्पष्ट किया कि भूमि की देखभाल बीएन वैलफेयर फाउण्डेशन कर रहा है।वृक्षों को बी एन ग्रुप के इशारे पर जेसीबी मशीन से उखड़वाया गया है।
यह कृत्य न केवल उत्तर प्रदेश ग्रामीण वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 4/10 का स्पष्ट उल्लंघन है, बल्कि यह टीटीजेड क्षेत्र के लिए सर्वोच्च न्यायालय के कठोर आदेशों की भी अवमानना है
अवैध आरा मशीन से लेकर 82 पेड़ों के कत्ल और पार्क गोद लेने का क्या है बीएन ग्रुप के मालिक अजय अग्रवाल से रिश्ता

बड़ा सवाल ये है अवैध आरा मशीन से लेकर 82 पेड़ों के कत्ल और पार्क गोद लेने का क्या है बीएन ग्रुप के मालिक अजय अग्रवाल से रिश्ता इस बात से आप दंग रह जाएंगे।
दरअसल मामला 2005 से है ।
बने रहें हमारे साथ अगली खबर में विस्तार से देंगे यह मामला।
लकड़ी से रिश्ता बनाम अजय अग्रवाल
देखने पार्ट 2 में





