– दो सदस्यीय जांच टीम मंगलवार को पहुंची गाँव
-जांच में पंचायत सीमा से बाहर लगवा दिए खरनजा
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भरत लाल गोयल पीड़ियू समाचार

फरह| शासन से की गई ग्रामीणों की शिकायत पर परखम प्रधान के 1.39 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की जांच करने मंगलवार को मत्स्य विभाग के निदेशक महेश चौहान व जिला पंचायत के अभियंता बी के शर्मा गाँव पहुँचे| मौके पर भौतिक सत्यापन किया तो टीम भौचक रह गई | जांच टीम को ग्रामपंचायत सदस्य योगेश माथुर, गोविंद, नंदकिशोर, बालकराम, बंगाली, जुवेदा खां, सर्वश, संतोष, भूल्लन आदि ने बताया कि प्रधान ने अन्धा बांटे रेवड़ी वाली कहावत को सिद्ध करते हुए दूसरी ग्राम पंचायतों में भी विकास का पेसा लगा दिया है | सदस्यों व ग्रामीणों ने टीम को बताया कि प्रधान व ग्राम पंचायत सचिब मिलीभगत कर विकास को आये 1.39 करोड़ रुपये को गटक गए है | टीम ने सचिव हरवेंद्र व प्रधान सुल्तान को पंचायत अभिलेखों सहित बुलाया | एक घंटे बाद प्रधान व सचिव टीम के समक्ष तो पहुंचे किंतु खाली हाथ | टीम ने विकास कार्यों के दस्तावेज मांगे तो प्रधान और सचिव एक दूसरे का मुंह देखने लगे | टीम के सदस्य निदेशक महेश ने सख्त रुख अपनाते हुए सचिव से पुन अभिलेख दिखाने को कहा तो पंचायत सचिव अभिलेख लाने के बहाने वहां से खिसक गया | इसके बाद उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया ¦ ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान व सचिव विकास कार्यों के पूरे पेसों को हजम कर गए है | एक दो खड़जो के अलावा गाँव में कोई विकास कार्य नहीं कराया है | जबकि विकास अधिकारी कार्यालय को पूर्व में प्रधान और सचिव द्वारा भेजी गई विकास रिपोर्ट में कूड़ा निस्तारण को 20 हजार, हैंडपंप मरम्मत, रीबोर, के नाम पर 6लाख 6500 रुपये दर्शा रखे हैं ¦ कूप घाट निर्माण के नाम पर 1.45 लाख, प्रशासनिक खर्चे में 7 लाख 94हजार 570 रूपए, टीटीएसपी मरम्मत के नाम पर 2.27 रुपए दर्शाए गए | ईंटों वाले खरजों की मरम्मत का खर्चा दिखाया गया है ¦ 99 लाख की कीमत के 39 इंटरलोकिंग खरजें निर्मित दर्शाए गए | मौके पर पहुंची जांच टीम को परखम में लगभग 20 लाख रुपये की लागत के चार खरजें ही लगे मिले | पंचायत से लगे नगला मुन्नी में 100 व 150 मीटर के दो और खड़जे निर्मित मिले ¦ जबकि लगभग 400 मीटर के खरनजे मीरपुर में लगवाए गए, जो गाँव पंचायत सीमा से बाहर है ¦ ग्रामीणों ने जांच टीम को बताया कि उक्त गाँव जमालपुर पंचायत में लगता है | प्रधान के परिवार के सदस्य उक्त गाँव में रहते हैं | उन लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए वहां लाखों की लागत के रास्ते बनवाए गए | ग्रामीणों ने बताया कि परखम के तालाब की खुदाई बिना अनुमति के करा दी और एक लाख की मिट्टी ब्लैक में बेच दी, जिसका उल्लेख अभिलेखों में कहीं दर्ज ही नहीं है ¦ ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान ने उक्त तालाब को मत्स्य पालन करने के लिए सहाबुद्दीन निवासी जानू गोवर्धन को 40 हजार रुपये को ठेका मौखिक रूप से उठा दिया | जबकि उक्त राशि को भी पंचायत अभिलेखों में नहीं दर्शाया गया है ¦ ग्रामीणों ने बताया कि साढ़े चार साल में पंचायत की कोई खुली बैठक नहीं बुलाई गई | प्रधान से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हर छह माह में बैठक बुलाई गई है | प्रधान से बैठक के फोटो ग्राफ़ व वीडियो मांगे गए तो वे इधर उधर झाँकने लगे | ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान ने गाँव मे विकास कार्य न कराकर अपने लोगों को लाभ पहुंचाया है | ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान ने अपने खेत के लिए रेल्वे भूमि से होकर रास्ते का निर्माण कराया है जबकि उक्त रास्ते का आम लोगों के लिए कोई उपयोग नहीं है ¦ ग्रामीणों और पंचायतों सद्स्यों की शिकायत की जांच की पुष्टि के बाद टीम मथुरा लौट गई |
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वर्जन
जांच में प्रधान कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका ¦ सचिव से जब अभिलेख मांगे गए तो वह अपने मोबाइल बंद कर खिसक गया | टीम ने प्रधान से बुधवार को अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा है |
महेश चौहान, निदेशक मत्स्य विभाग मथुरा






