मथुरा,फरह।देवेन्द्र गोस्वामी
डाॅ.भीमराव आम्बेडकर ने समाज में व्याप्त ऊँच-नीच ,छूआछूत ,समेत तरह-
की विषमता के विरुद्ध जीवन पर्यन्त संघर्ष किया। उन्होंने सामाजिक भेदभाव ,अन्याय, अत्याचार, उत्पीड़न से मुक्ति दिलाने को दलित समाज को जागरुक, शिक्षित, संगठित होने का मूलमंत्र दिया। फिर संविधान में दलित वर्ग को बराबरी का अधिकार दिलाने को दूसरे वर्ग के लोगों की तरह उन्हे मताधिकार और आरक्षण देकर जीवन के विभिन्न क्षेत्र में प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया।‘ उक्त उद्गार केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान में भारतीय संविधान के निर्माता डाॅ.भीमराव आम्बेडकर के 127वीं जन्मोत्सव को ‘राष्ट्रीय समरसता दिवस के रूप में आयोजित समारोह में बल्देव से भाजपा विधायक पूरन प्रकाश ने मुख्य आतिथि के रूप में व्यक्त किये।
उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहेब आम्बेडकर दलितों के जीवन में आशा की जिस ज्योति को जलाया था, उसे प्रज्ज्वलित किये रहने की आवश्यकता है।
डा.गोपालदास ने मुख्य वक्ता के रूप में विस्तार से अपने विचार व्यक्त करते हुए बाबा साहेब आम्बेडकर क दलित समाज के साथ होने वाले भेदभाव और अत्याचारों से लड़ने के विभिन्न प्रसंगों का किया और निर्धन और दलितों का मसीहा बनाया।
संस्थान के निदेशक डाॅ.मनमोहन सिंह चैहान ने कहा कि डाॅ भीमराव आम्बेडकर का भारतीय संविधान के निर्माण में अतुलनीय योगदान किया,जिसके लिए यह देश सदैव उनका कृतज्ञ रहेगा। वह सही माने निर्धन, कमजोर, असहाय वर्ग के हित चिन्तक थे।
प्रशिक्षणार्थी विजय कुमार ने बाबा साहेब की जीवन के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला। इस समारोह में देश के 20राज्यों से प्रशिक्षण हेतु सस्थान में आये प्रशिक्षणार्थी भी सम्मिलित हुए। समारोह में वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ.वी.राजकुमार, प्रधान वैज्ञानिक डाॅ.यू.बी.चैधरी आदि के साथ-साथ अन्य वैज्ञानिक, तकनीशियन, कर्मचारी, उनके परिजन तथा आसपास के गाँवों के सामाजिक कार्यकर्ता भी सम्मिलित हुए।
मुख्य अतिथि का माल्यपर्ण कर स्वागत संस्थान के निदेशक डाॅ.मनमोहन सिंह चैहान ने किया गया।




